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स्कूल में पढ़ाई या ‘नशे की पाठशाला’? शिक्षक का वीडियो वायरल, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जांच की मांग

कोरबा 04 अगस्त। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत सरभोका स्थित आश्रम शाला के एक शिक्षक का कथित तौर पर शराब के नशे में गांव में घूमते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने […]

कोरबा 04 अगस्त। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम पंचायत सरभोका स्थित आश्रम शाला के एक शिक्षक का कथित तौर पर शराब के नशे में गांव में घूमते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन शिक्षकों के भरोसे बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी है, अगर वही कथित तौर पर नशे में नजर आएं तो सवाल उठना लाजिमी है कि स्कूल में पढ़ाई हो रही है या व्यवस्था खुद ‘नशे में’ चल रही है? ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आश्रम शाला में पदस्थ शिक्षक राजेश कुमार बंजारे शाला समय के दौरान कथित रूप से शराब के नशे में पाए गए। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने का दावा किया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, शिक्षक की कथित नशे की हालत की जानकारी तत्काल ग्राम सरपंच को दी गई। इसके बाद एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

ग्राम सरपंच के अनुसार, शिक्षक के व्यवहार और विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ दिन पहले ही विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को लिखित और मौखिक शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद बीईओ स्वयं सरभोका आश्रम शाला का निरीक्षण करने पहुंचे थे। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि निरीक्षण के बावजूद कथित तौर पर स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। ऐसे में ग्रामीण अब विभागीय कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, सरभोका आश्रम शाला में करीब 130 से 135 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि विद्यालय में सिर्फ तीन शिक्षक पदस्थ हैं। आरोप है कि इनमें से दो शिक्षक अक्सर शराब के नशे में रहते हैं और नियमित रूप से स्कूल से अनुपस्थित भी रहते हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और स्कूल की व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने वर्षों से शिकायतों के बावजूद यदि व्यवस्था जस की तस बनी हुई है, तो सवाल यह है कि शिकायतें अधिकारियों की टेबल तक पहुंचती हैं या वहीं जाकर ‘आराम’ करने लगती हैं?

ग्रामीणों ने दावा किया है कि संबंधित शिक्षकों के रवैये को लेकर पिछले 13 से 14 वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं। कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जानकारी देने के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। अब सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले शिक्षक के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल वीडियो वायरल होने और ग्रामीणों की शिकायतों के बीच शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए वायरल वीडियो और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि जांच में शिक्षक के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो विभाग की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

आश्रम शाला में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं। सवाल सिर्फ एक वायरल वीडियो का नहीं, बल्कि उन 130 से ज्यादा बच्चों की पढ़ाई और भविष्य का है, जिनके लिए स्कूल ही बेहतर शिक्षा और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद है।

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