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बुंदेली-सुतर्रा मार्ग पर ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, 4 घंटे चक्काजाम; तहसीलदार के लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन

कोरबा, 8 अगस्त 2026। कटघोरा विकासखंड के बुंदेली-सुतर्रा मुख्य मार्ग की बदहाल सड़क और क्षतिग्रस्त पुल की समस्या को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम […]

कोरबा, 8 अगस्त 2026। कटघोरा विकासखंड के बुंदेली-सुतर्रा मुख्य मार्ग की बदहाल सड़क और क्षतिग्रस्त पुल की समस्या को लेकर शुक्रवार को ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और चक्काजाम कर दिया।

चक्काजाम के चलते बांकी मोंगरा-सुतर्रा मार्ग पर करीब चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। राहगीरों और वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

जर्जर सड़क और क्षतिग्रस्त पुल से ग्रामीण परेशान

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बुंदेली-सुतर्रा मार्ग लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण आवागमन मुश्किल हो गया है। वहीं मार्ग पर स्थित क्षतिग्रस्त पुल के कारण भी ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि सड़क और पुल की समस्या को लेकर कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया।

सड़क पर बैठकर की नारेबाजी

आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने जर्जर सड़क की तत्काल मरम्मत कराने और क्षतिग्रस्त पुल का निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की मांग की।

चक्काजाम की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की।

तहसीलदार के लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ चक्काजाम

प्रदर्शनकारियों और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद तहसीलदार की ओर से मांगों को लेकर लिखित आश्वासन दिया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया और करीब चार घंटे बाद मार्ग पर यातायात बहाल हो सका।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि आश्वासन के बावजूद सड़क और पुल की समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

प्रशासन के आश्वासन पर टिकी निगाहें

फिलहाल तहसीलदार के लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हो गया है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन द्वारा किए गए वादों पर है। सड़क की मरम्मत और पुल निर्माण का काम कब शुरू होता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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