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मानसून के दौरान रेत उत्खनन पर प्रतिबंधः सुबह 4 बजे नदी में उतर रहे ट्रैक्टर, नदिया खार में अवैध रेत उत्खनन का आरोप

कोरबा 10 अगस्त। जिले में मानसून के दौरान रेत उत्खनन पर प्रतिबंध के बावजूद कथित अवैध रेत खनन का मामला सामने आया है। नदिया खार स्थित नदी तट पर तड़के सुबह करीब 4 बजे से ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि अंधेरे का फायदा उठाकर नदी से […]

कोरबा 10 अगस्त। जिले में मानसून के दौरान रेत उत्खनन पर प्रतिबंध के बावजूद कथित अवैध रेत खनन का मामला सामने आया है। नदिया खार स्थित नदी तट पर तड़के सुबह करीब 4 बजे से ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू होने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि अंधेरे का फायदा उठाकर नदी से बिना अनुमति रेत निकाली जा रही है।

इस पूरे मामले ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रतिबंधित अवधि में अवैध उत्खनन हो रहा है, तो सवाल यह भी है कि जिम्मेदार विभाग को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिल रही है। मानसून अवधि के दौरान नदियों के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए 10 जून से 15 अक्टूबर तक रेत घाटों पर उत्खनन प्रतिबंधित रहने की बात कही गई है। इसके बावजूद नदिया खार नदी तट पर तड़के सुबह से ट्रैक्टरों की आवाजाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि अंधेरे में नदी से रेत निकालकर ट्रैक्टरों के जरिए उसका परिवहन किया जा रहा है।

अवैध रेत उत्खनन के आरोपों के बीच पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। लगातार और अनियंत्रित तरीके से रेत निकाले जाने से नदी के प्राकृतिक स्वरूप और जल प्रवाह पर असर पड़ने की आशंका रहती है। वहीं, यदि बिना वैध रॉयल्टी और अनुमति के रेत का परिवहन हो रहा है तो इससे शासन को राजस्व का नुकसान भी हो सकता है।

स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का दावा है कि कथित अवैध रेत उत्खनन की समस्या केवल नदिया खार तक सीमित नहीं है। जिले के अन्य प्रमुख रेत घाटों पर भी प्रतिबंधित अवधि में गतिविधियां होने की शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में प्रशासन और खनिज विभाग की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नदी तट पर सुबह 4 बजे से ट्रैक्टरों की आवाजाही हो रही है, तो संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था क्या कर रही है? क्या विभाग की टीम नियमित निरीक्षण कर रही है? क्या रेत परिवहन करने वाले वाहनों की जांच की जा रही है? और यदि प्रतिबंध के बावजूद उत्खनन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?

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