• Home  
  • पहले न्याय फिर जनसुनवाईः एसईसीएल मानिकपुर खदान विस्तार से आक्रोशित ग्रामीणों का अल्टीमेटम, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का मिला साथ, सीएमडी को लिखा पत्र
- कोरबा - छत्तीसगढ़ - राजकाज - राजनीति - संगठन - समस्या - सुरक्षा

पहले न्याय फिर जनसुनवाईः एसईसीएल मानिकपुर खदान विस्तार से आक्रोशित ग्रामीणों का अल्टीमेटम, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का मिला साथ, सीएमडी को लिखा पत्र

कोरबा 19 अगस्त। छत्तीसगढ़ के कोरबा में एसईसीएल की मानिकपुर विस्तार परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों ने पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले पुराने विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मामलों का समाधान करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं […]

कोरबा 19 अगस्त। छत्तीसगढ़ के कोरबा में एसईसीएल की मानिकपुर विस्तार परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों ने पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले पुराने विस्थापन, मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मामलों का समाधान करने की मांग उठाई है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक वे जनसुनवाई का विरोध करेंगे।

ग्रामीणों ने मंगलवार को पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं बताईं। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन का अर्जन 1964 में किया गया था, लेकिन छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक जमीन जाने के बाद कई परिवारों को अपेक्षित पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार नहीं मिल पाया। कुछ परिवारों की जमीन पर खदान शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ प्रभावितों की जमीन का हिस्सा अभी भी उनके कब्जे में है। ग्रामीणों ने शेष जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया और प्रस्तावित मुआवजे पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि उनके परिवारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है।

ग्रामीणों ने कहा कि पुराने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार के मामलों का समाधान किए बिना पर्यावरणीय जनसुनवाई कराना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने विरोध को लेकर कड़े तेवर दिखाते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो वे लाठी-डंडे खाएंगे और जेल जाने को भी तैयार हैं।

ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन को पत्र भेजा है। उन्होंने मानिकपुर विस्तार परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। अग्रवाल ने कहा कि पहले प्रभावित परिवारों के साथ बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े पुराने लंबित मामलों का निराकरण होने के बाद ही खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

पूर्व मंत्री ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय करके नहीं चुकाई जानी चाहिए।उन्होंने आठों गांवों के पुराने और नए प्रभावित परिवारों की बैठक बुलाकर उनकी समस्याएं सुनने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि समस्याओं के समाधान से पहले जनसुनवाई कराई गई तो ग्रामीणों की ओर से इसका और अधिक जोरदार विरोध हो सकता है।

मानिकपुर विस्तार का मुद्दा प्रभावित ग्रामीणों के लिए सिर्फ नई खदान परियोजना का मामला नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि 1964 में जमीन जाने के बावजूद विस्थापन और अधिकारों से जुड़े कई सवाल आज भी कायम हैं। अब ग्रामीणों की मांग है कि नई परियोजना की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले पुराने मामलों का समाधान किया जाए और जमीन देने वाले परिवारों को पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार का उनका हक मिले।

About Us

Lorem ipsum dol consectetur adipiscing neque any adipiscing the ni consectetur the a any adipiscing.

Email Us: infouemail@gmail.com

Contact: +5-784-8894-678

Empath  @2024. All Rights Reserved.