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पारदर्शिता, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, समयबद्ध भुगतान और प्रक्रियाओं में तेजी लाने लोक निर्माण विभाग में लागू होगा ‘वमिस’

निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए कैबिनेट ने दी है मंजूरी कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक, बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन एवं गुणवत्ता की निगरानी अब एक ही प्लेटफॉर्म पर लोक निर्माण विभाग की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली होगी पारदर्शी, अभिलेख-आधारित और जवाबदेह – उप मुख्यमंत्री अरुण साव रायपुर 24 अगस्त 2026. लोक निर्माण विभाग […]

निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए कैबिनेट ने दी है मंजूरी

कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक, बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन एवं गुणवत्ता की निगरानी अब एक ही प्लेटफॉर्म पर

लोक निर्माण विभाग की सम्पूर्ण कार्यप्रणाली होगी पारदर्शी, अभिलेख-आधारित और जवाबदेह – उप मुख्यमंत्री अरुण साव

रायपुर 24 अगस्त 2026. लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के डिजिटल प्रबंधन के लिए वर्क एण्ड अकाउंट्स मैनेजमेंट इंटीग्रेशन सिस्टम (WAMIS) लागू किया जाएगा। ‘वमिस’ (WAMIS) से कार्यों की स्वीकृति, ई-प्राक्कलन, ई-प्रोक्योरमेंट, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB), बिल भुगतान, लेखा प्रबंधन तथा गुणवत्ता की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएं एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित होंगी। इस प्रणाली से निर्माण कार्यों की पारदर्शिता बढ़ेगी, भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी तथा कार्यों की रियल-टाइम निगरानी की जा सकेगी। इससे निर्माण परियोजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और जवाबदेह होगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में विगत 5 अगस्त को हुई कैबिनेट की बैठक में लोक निर्माण विभाग में ‘वमिस’ को लागू करने की मंजूरी दी गई है। सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित इस प्रणाली को पहले लोक निर्माण विभाग में लागू किया जाएगा, जिसके बाद अन्य निर्माण एवं अधोसंरचना विभागों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। राज्य कैबिनेट का यह निर्णय उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव द्वारा विभाग में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समयबद्धता पर लगातार दिए जा रहे जोर की परिणति है। लोक निर्माण विभाग में डिजिटल कार्य-संस्कृति की दिशा में राज्य शासन की यह महत्वपूर्ण पहल है।

उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव लोक निर्माण विभाग में प्रत्येक स्तर पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने निर्माण कार्यों की स्वीकृति से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया को कागजी औपचारिकताओं से मुक्त कर पूर्णतः ऑनलाइन एवं अभिलेख-आधारित करने लगातार जोर दे रहे थे। राज्य कैबिनेट की मोहर के बाद अब इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा देश के विभिन्न राज्यों में प्रचलित कार्य एवं लेखा प्रबंधन प्रणालियों के तुलनात्मक अध्ययन तथा सी-डैक (C-DAC), पुणे द्वारा विकसित एवं अनेक राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित ‘वमिस’ (WAMIS) को छत्तीसगढ़ की आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वाधिक उपयुक्त पाया गया। इसी आधार पर प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया था।

क्या है ‘वमिस’?

‘वमिस’ (Work & Accounts Management Integration System) भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौ‌द्योगिकी मंत्रालय के अधीन संस्थान सी-डैक, पुणे द्वारा विकसित एक एकीकृत प्रणाली है, जो किसी भी निर्माण कार्य के सम्पूर्ण जीवन-चक्र… प्रारंभिक प्रस्ताव से लेकर कार्य पूर्णता एवं अंतिम भुगतान तक को डिजिटल रूप में संचालित करती है। इस प्रणाली में कार्यों की प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति, ई-प्राक्कलन (e-Estimate) एवं अनुमानित लागत का ऑनलाइन निर्धारण, ई-प्रोक्योरमेंट (निविदा प्रक्रिया) से एकीकरण, ई-मेजरमेंट बुक (e-MB) मापन पुस्तिका का डिजिटलीकरण, ठेकेदारों के देयकों (बिल) की ऑनलाइन तैयारी एवं भुगतान, मासिक लेखा, कैशबुक एवं बजट आबंटन के विरुद्ध व्यय का प्रबंधन, जियो-टैग्ड छायाचित्रों सहित कार्यों की गुणवत्ता एवं भौतिक प्रगति की निगरानी जैसी सभी प्रक्रियाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर समाहित हैं।

लोक निर्माण विभाग के कार्यों में आएंगे ये बदलाव

राज्य में ‘वमिस’ के लागू होने के बाद कार्य के सभी स्तरों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसमें प्रत्येक कार्य की स्वीकृति, निविदा, मापन एवं भुगतान का डिजिटल अभिलेख उपलब्ध रहेगा। इससे निर्माण कार्यों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सकेगी। वरिष्ठ अधिकारी एवं शासन स्तर पर कार्यों की भौतिक तथा वित्तीय प्रगति की समवर्ती निगरानी संभव होगी।

‘वमिस’ से ठेकेदारों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा। देयकों की ऑनलाइन प्रक्रिया से ठेकेदारों को भुगतान में विलंब कम होगा और परियोजनाओं की गति बढ़ेगी। अधिकांश प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम से कम होने तथा मापन एवं बिलिंग प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से त्रुटि तथा अनियमितता की संभावना घटेगी।

इस प्रणाली से लेखा संधारण में भी सुधार आएगा। महालेखाकार कार्यालय को प्रस्तुत की जाने वाली मासिक लेखा प्रविष्टियाँ इससे स्वतः तैयार हो जाएंगी। विभागीय परिसंपत्तियों एवं व्यय का एकीकृत डेटाबेस हमेशा उपलब्ध रहने से विभागीय फैसलों और नीतियों के निर्धारण में भी सहायता मिलेगी।

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