• Home  
  • कोरबा के निजी अस्पताल में नवजात की मौत पर विवाद, इलाज में लापरवाही के आरोप; दूसरा शिशु बिलासपुर में भर्ती
- देश-विदेश - ब्रेकिंग न्यूज़

कोरबा के निजी अस्पताल में नवजात की मौत पर विवाद, इलाज में लापरवाही के आरोप; दूसरा शिशु बिलासपुर में भर्ती

कोरबा, 19 जुलाई। शहर के एक निजी अस्पताल में जुड़वा नवजात बच्चों के इलाज को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर समय रहते उचित उपचार नहीं देने और गंभीर स्थिति के बावजूद हायर सेंटर रेफर करने में देरी करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कथित लापरवाही के […]

कोरबा, 19 जुलाई। शहर के एक निजी अस्पताल में जुड़वा नवजात बच्चों के इलाज को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर समय रहते उचित उपचार नहीं देने और गंभीर स्थिति के बावजूद हायर सेंटर रेफर करने में देरी करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि कथित लापरवाही के कारण एक नवजात की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर हालत में बिलासपुर के अस्पताल में उपचाराधीन है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार परशुराम नगर दादर निवासी शशिकांत ओझा की पत्नी ने 17 जुलाई को जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। परिवार के अनुसार करीब 16 वर्ष बाद संतान होने से घर में खुशी का माहौल था। परिजनों का कहना है कि जन्म के कुछ घंटे बाद ही एक नवजात में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे, जिसकी जानकारी तत्काल अस्पताल के चिकित्सकों को दी गई। आरोप है कि डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीर नहीं बताया और उपचार से सब कुछ सामान्य होने का भरोसा दिलाते रहे।

परिजनों का आरोप है कि नवजात की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन उसे समय रहते बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर नहीं किया गया। जब स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई, तब उसे दूसरे निजी अस्पताल भेजा गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद दूसरे नवजात की जांच शिशु रोग विशेषज्ञ से कराई गई, जिन्होंने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बिलासपुर रेफर कर दिया। वर्तमान में उसका इलाज बिलासपुर के अस्पताल में जारी है।

नवजात की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा

नवजात की मौत की सूचना मिलते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। वे आयुष्मान अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगने लगे। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय मेडिकल नियमों का हवाला देना शुरू कर दिया। इससे विवाद बढ़ गया और अस्पताल स्टाफ तथा परिजनों के बीच तीखी बहस के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। परिजन अस्पताल की प्रमुख चिकित्सक डॉ. ज्योति श्रीवास्तव को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल

पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि नवजात की मौत के बाद वे स्वयं पुलिस चौकी पहुंचकर अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही की शिकायत दर्ज कराने गए थे, लेकिन पुलिस तत्काल अस्पताल नहीं पहुंची। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से सूचना दिए जाने के बाद ही पुलिस मौके पर पहुंची।

अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया है। प्रबंधन का कहना है कि नवजात की हालत पर लगातार चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही थी। पीलिया के लक्षण सामने आने के बाद आवश्यक उपचार शुरू किया गया और जब चिकित्सकीय स्थिति गंभीर हुई, तभी बच्चे को उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया गया। अस्पताल का दावा है कि उपचार निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया और किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई।

जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट

पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नवजात की मौत इलाज में कथित लापरवाही का परिणाम थी या चिकित्सकीय जटिलताओं के कारण हुई। फिलहाल यह मामला निजी अस्पतालों में नवजात शिशुओं के उपचार, रेफरल प्रणाली और चिकित्सा जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

About Us

Lorem ipsum dol consectetur adipiscing neque any adipiscing the ni consectetur the a any adipiscing.

Email Us: infouemail@gmail.com

Contact: +5-784-8894-678

Empath  @2024. All Rights Reserved.